अनमोल वचन

अनमोल वचन

हर चीज सीमा और मर्यादा में ही अच्छी लगती है। हितोपदेश में भी शिक्षा दी गई है ‘अति सर्वत्र वर्जयेत’ अर्थात अति सदैव त्याज्य है। बच्चों के पालन पोषण में भी कई बार अति हो जाती है, सीमाओं की उपेक्षा कर दी जाती है। कई माता-पिता बच्चों को आवश्यकता से अधिक दुलार करते हैं और कुछ आवश्यकता से अधिक सख्ती करते हैं, छोटी-छोटी बातों पर प्रताडना तथा मारपीट और गाली गलौच तक करते हैं। दोनों ही तरीकों से बच्चों के बिगडने तथा कुमार्गी हो जाने की संभावना रहती है। अमर्यादित स्नेह-दुलार बच्चों में अनेक बुराईयां पैदा कर देता है। माता-पिता मोहवश बच्चों को कोई काम नहीं करने देते तथा उचित अनुचित सभी प्रकार की मांगों की पूर्ति करते हैं। इससे बच्चों में अनेक प्रकार की बुराईयां पैदा होने लगी हैं। ऐसे बच्चे आत्म र्निभर तथा स्वावलम्बी नहीं बन पाते। आलस्य, आवारागर्दी, फिजूलखर्ची तथा परावलम्बन आदि बुराईयां पनपने लगती हैं। इस प्रकार की बुराईयां अभिभावकों की भूल के कारण पैदा होती है, अत्याधिक लाड-प्यार से बच्चे बिगड जाते हैं। अपराध जगत में बहुधा वें ही बच्चे प्रवेश करते हैं, जिन्हें सीमा से अधिक लाड-प्यार मिला अथवा उपेक्षा और प्रताडना मिली।

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