अनमोल वचन

अनमोल वचन

यह ज्ञान लगभग सभी व्यक्तियों को है कि अहंकार बहुत बडा दुर्गुण है, किन्तु इसके बावजूद वह थोडी सी सफलता मिलते ही अहंकार करने लगता है। वह स्वयं को बहुत बडा और दूसरों को हीन समझने की भूल कर बैठता है। निश्चित रूप अहंकारी व्यक्ति अपने विवेक को खो देता है, उसकी सोच संकीर्ण हो जाती है। वह केवल अपना हित देखना चाहता है, परन्तु विनम्रता व्यक्ति से ऐसा कार्य करा देती है, जिसकी कल्पना अहंकारी व्यक्ति कभी कर ही नहीं सकता। यही कारण है कि विनम्रता का अस्तित्व सदैव बना रहता है और अहंकार को अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष करना पडता है। उसकी नियति ही टूटकर बिखरना है। विनम्रता से ही व्यक्ति का विवेक जाग्रत होता है, समझदारी बढती है और वह औचित्यपूर्ण एवं परहित के कार्य ही करता है, किन्तु अहंकारी व्यक्ति का विवेक कुंद हो जाता है। उसकी विवेकहीनता उससे ऐसे कार्य करा देती है, जिससे उसकी प्रतिष्ठा न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाती है। विनम्रता का सबसे बडा लाभ यह है कि विनम्र व्यक्ति में सद्गुणों का समावेश स्वत: ही होने लगता है। इसी कारण विनम्र व्यक्ति को गुणों की खान कहा गया है।
 

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