अनमोल वचन

अनमोल वचन

विनम्रता एक ऐसा गुण है, जो मनुष्य के व्यक्तित्व को विकसित करने में अहम् भूमिका निभाता है, वहीं अहंकार वह दुर्गुण है, जिसके पनपते ही व्यक्तित्व का विकास रूक सा जाता है। अहंकार व्यक्तित्व में पनपने वाली दुर्गन्ध है, जबकि विनम्रता सुगन्ध। इसलिए विनम्रता को व्यवहारिक ही नहीं, आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्व दिया गया है। विनम्रता का तात्पर्य केवल बाहरी रूप से सरल, सहनशील तथा शालीन बनना नहीं, बल्कि आन्तरिक दृष्टि से भी संवेदनशील होता है। विनम्र व्यक्ति की योग्यता का अधिक तेजी से विकास होता है, वह ग्रहणशील होता है, मृदुल स्वाभाव का होता है, इसीलिये ऐसे व्यक्ति को सभी पसंद करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि ‘प्रभुता पाई काहि मद नाही अर्थात किसी भी प्रकार से धन, पद, सत्ता, विद्या पाते ही किस आदमी के भीतर अभिमान पैदा नहीं हो जाता। आशय यह है कि अधिकांश व्यक्ति अहंकार के शिकार हो जाते हैं, स्वयं को सबसे बडा समझने लगते हैं, किन्तु जब आदमी इस सच्चाई को समझ लेता है कि धन सम्पत्ति जो भी उसके पास है, वह प्रभु कृपा से प्राप्त हुई है और वह उस सम्पत्ति का स्वामी नहीं है, तभी वह अहंकार से बच सकता है।

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