अनमोल वचन

अनमोल वचन

जब व्यक्ति में सौंदर्य बोध का अभाव हो और वह बाहरी रूप से सुन्दर दिखने को ही सौंदर्य मान ले तो वह भीतर के गुणों को विकसित करने की सोच ही नहीं पाता। फल स्वरूप वह अपनी दृष्टि में कभी सुन्दर हो नहीं सकता। सुन्दरता का अहसास जगाने को पहले आत्म विश्वास को जगाना होगा, फिर अपने अन्दर के अच्छे गुणों को देखना होगा, उन्हें विकसित करना होगा। कुछ लोग देखने में सुन्दर लगते हैं, उन्हें अपनी सुन्दरता का अभिमान भी होता है, किन्तु अहंकारवश वे अपने व्यक्तित्व को निखार नहीं पाते, फलस्वरूप आन्तरिक सौंदर्य के अभाव में वह सम्मान मिल ही नहीं पाता। वह इस सच्चाई को जान ही नहीं पाता कि असली सुन्दरता तो उसके अच्छे कार्यों में है। जो व्यक्ति जितने अच्छे भाव के साथ अपने कार्यों में लगा रहता है, वह अपने आंतरिक सौंदर्य को और निखारता है। सत्य यह है कि शरीर की सुन्दरता पार्थिव है, आयु बढने के साथ वह टिकी नहीं रह सकती, बुजुर्ग होने के साथ सुन्दर दीखने वाले शरीर में भी झुर्रियां पडती हैं, काले बालों को भी सफेद होना पडता है। केवल अच्छे कार्य ही होते हैं, जो पुण्यरूप में संचित होकर उसे आकर्षक बनाते हैं। वृद्ध व्यक्ति भी अपने कार्यों और अनुभवों के कारण समाज में पूजित तथा सम्मानित हो सकता है।

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