अनमोल वचन

अनमोल वचन

सौंदर्य बोध मनुष्य की जन्मजात विशेषता है। सुन्दरता सभी को पसंद है। सुन्दर दिखना और सुन्दर देखना सभी चाहते हैं, परन्तु सुन्दरता के अर्थ सभी के लिए अपने-अपने व्यक्तिगत होते हैं। एक ही वस्तु किसी को सुन्दर और किसी को कुरूप लग सकती है। यह पूर्णतया व्यक्ति के सौंदर्य बोध की क्षमता पर निर्भर है। भगवान की बनाई इस दुनिया में कण-कण में सुन्दरता विद्यमान है। बस देखने की दृष्टि होनी चाहिए, परन्तु आज सौंदर्य के मूल्य और मान दंड दैहिक सौंदर्य के धरातल पर सिमटकर रह गये हैं, जबकि देह तो सुन्दरता का एक माध्यम मात्र है। असली सौंदर्य विचारों और भावनाओं में प्रस्फुटित होता है, व्यक्ति के रंग रूप से नहीं। सच्चाई यह है कि सौंदर्य आचरण से निखरता है। सुन्दर दिखने और सुन्दर होने में पर्याप्त अंतर है। सुन्दर दिखने के लिए तो कृत्रिमता का आवरण ओढा जा सकता है, परन्तु सुन्दर होने-बनने के लिए आंतरिक गुणों के सौंदर्य को अर्जित करना पडता है। सौदर्य तो वह है जो मन को आकर्षित करें, आंतरिक प्रसन्नता दें। व्यक्ति या वस्तु का कोई भी वह गुण जो हमें सुखद अनुभव दे वहीं सुन्दर है। प्राय: लोग शारीरिक सौंदर्य विशेषकर त्वचा के गौरेपन को ही सुन्दरता का मापदण्ड मान बैठते हैं। वे इस भ्रांति के कारण अपना समय ऊर्जा तथा धन सौंदर्य प्रसाधनों में व्यर्थ नष्ट करते रहते हैं।
 

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