अनमोल वचन

अनमोल वचन

ईशोपनिषद की शिक्षा है कि सभी चराचर प्राणियों में उसी परम पिता का दर्शन करते हुए, उन्हीं के निमित्त कर्मों को समर्पित करते हुए जीवन जीने से मनुष्य भव बन्धनों से पार चला जाता है। आत्मवत सर्वभूतेषू (अपने जैसा सभी प्राणियों में) की भावना जब मनुष्य के भीतर संचारित होती है तो वह किसी पीडित व्यक्ति को देखकर शांत नहीं बैठ सकता। उसके अन्दर करूणा जाग उठती है और वह निष्काम भाव से उस प्राणी को प्रभु का अंश मानते हुए सेवा में तत्पर हो जाता है। इस प्रकार की निष्काम सेवा की भावना श्रेष्ठ पुरूषों में स्वाभावत: होती है। सेवा अनमोल होती है, क्योंकि उसमें कुछ पाने का भाव नहीं, बल्कि समर्पण का भाव होता है। व्यक्ति के अहंकार का जब विसर्जन हो जाता है, तब समर्पण जन्म लेता है। समर्पित व्यक्ति से ही निष्काम सेवा सम्भव हो पाती है। महिमा निष्काम सेवा की ही होती है, जो व्यक्तित्व को प्रकाशित और उज्जवल बना देती है तथा उसे जीवन में उस स्थान पर पहुंचा देती है, जिसकी वह कल्पना भी नहीं करता। इसलिए निष्काम सेवा के महत्व को जानते हुए, दूसरों की पीडा, कष्ट, कठिनाईयों से संवेदित होते जीवन भर सेवा मार्ग का अनुसरण कर प्रभु के प्यार की पात्रता प्राप्त करें।

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