अनमोल वचन

अनमोल वचन

‘संसार दीर्घ रोगस्य सुविचारो महा औषधम्’ अर्थात संसार का यह लम्बा बडा रोग है, जिसकी महाऔषधि केवल विचार में छिपी शक्ति है। रोग क्या है, रोग है ‘आवागमन’। यह एक-दो दिन, एक-दो वर्ष या एक-दो शताब्दी तक चलने वाला रोग नहीं। यह करोडो वर्षों तक चलने वाला रोग है। पैदा होना, मरना, फिर पैदा होना, फिर मरना। यह चक्कर कहीं समाप्त होता हुआ प्रतीत नहीं होता, यही तो संसार है। यही ऐसा रोग है, जिसकी औषधि आसानी से मिलती नहीं। वह औषधि क्या है? सुविचारों महाऔषधम्। अच्छे विचार ठीक विचार, यही इस रोग की महा औषधि हैं। अच्छे विचार क्या हैं? मैं कौन हूं, कहां से आया हूं, किसलिए आया हूं, कहां जाना है मुझे? यह संसार किसका है, कौन इसे चलाने वाला है, ऐसे प्रश्नों को सोचना, उनका उत्तर ढूंढने के बाद अपने जीवन को उसके अनुसार ढालना। ऐसा करने में जब सफलता मिल जायेगी तो इनसे विचारों में पवित्रता आयेगी, निश्चित आयेगी और जब विचार पवित्र होंगे तो आदमी स्वयमेव ठीक रास्ते पर चलेगा। कठिनाईयां आयेंगी तो भी वह विचलित नहीं होगा।

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