अनमोल वचन

अनमोल वचन

शान्ति चाहिए तो परमात्म नियमों के अनुसार अपने जीवन को चलाओ, स्वयं को अनुशासन में बांधो। हर बात का समय निश्चित करो। कब जागना है, कितनी देर व्यायाम करना है, किस समय स्नान करना है, कितनी देर प्रभु भजन में बैठना है, किस समय खाना है, क्या खाना है, कितना खाना है, किस समय बच्चों के साथ खेलना है, किस समय सोना है, हर बात के लिये समय निश्चित करो। अपने आपको नियम में बांधो। अपने लिये स्वयं कायदे कानून तय करो और फिर उसके अनुसार चलते जाओ। इस प्रकृति को देखो। यह जड प्रकृति यदि नियमों के अनुसार चल सकती है तो हम क्यों नहीं चल सकते। चने का बीज बोयेंगे तो उससे पैदा होने वाले पौधों पर चने ही लगेंगे, अंगूर या बेर नहीं। अंगूर की बेल लगाओगे तो समय आने पर अंगूर ही लगेंगे, मटर या मूंगफली नहीं। बिल्कुल साथ-साथ नीम और चीकू लगाओ तो नीम में अपनी स्वाभाविक कडुवाहट होगी और चीकू में मिठास। भूमि वही, पानी वही, एक ही सूर्य का प्रकाश दोनों को मिलता है। एक जैसी वर्षा दोनों पर होती है, परन्तु फल लगते हैं अलग-अलग, क्योंकि दोनों के बीज अलग-अलग हैं। प्रकृति का नियम यह है कि जैसा बीज होगा, फल भी वैसा ही मिलेगा, इसलिए जैसा बोओगे, वैसा ही फल पाओगे। मर्जी आपकी, क्योंकि भुगतना आपको ही है।

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