अनमोल वचन

अनमोल वचन

कई लोगों को कहते सुना होगा कि पहले लोग सुखी थे और आज दुखी हैं। सुखी क्यों नहीं। इसका सीधा सा उत्तर है पहले लोग इन्द्र (परमात्मा) की पूजा करते थे और आज इन्द्रियों की और इन्द्रियों की पूजा ऐसी है जो थोडी देर के लिये जरूर सुख का अनुभव करा सकती है, परन्तु इस सुख के पीछे दुख छिपा होता है। जैसे थोडे से फूलों के नीचे जहरीला सांप फन उठाये बैठा हो। इन्द्रियों की पूजा करने वाले को सुख कभी नहीं मिलता। इन्द्रियों की पूजा जिस मार्ग की ओर ले जाती है, उस मार्ग का अंत महाविनाश है। आजकल दुर्बल बच्चे अधिक पैदा हो रहे हैं, वह इसलिए कि उनके मां-बाप ने इन्द्र की नहीं, इन्द्रियों की पूजा की है। जिनके मां-बाप गलत रास्ते पर चले हो तो बच्चे इन गल्तियों के भंडार बन जायेंगे। मां-बाप शिकायत करते हैं कि बच्चे आज्ञाकारी नहीं, उनका अपमान करते हैं, गलत संगति में जा रहे हैं, तो भाई अपने को देखो, तुम्हारे आचरण कैसे हैं, तुमने अब तक के जीवन में क्या किया है, उसी का परिणाम तो भुगत रहे हो। अब भी समय है, सुधर जाओ, नहीं तो यह जीवन भार स्वरूप होने लगेगा, फिर पछताओगे, रोओगे और इस रोने और पछताने से कुछ नहीं होगा।

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