अनमोल वचन

अनमोल वचन

समस्याएं हर व्यक्ति के जीवन में आती हैं। कभी-कभी उसका समाधान वह स्वयं अकेले नहीं कर पाता। वह अपनी समस्या में उन व्यक्तियों से सहायता चाहता है, जिन्हें वह शुभचिंतक समझता है, सावधानी यह बरतें कि ऐसे लोगों से कभी अपनी समस्या साझा न करें, जो एक कान से सुनकर उसे दूसरे कान से बाहर निकाल देते हैं, इसका अर्थ यही है कि वे आपकी परवाह किंचित भी नहीं करते। इसलिए सत्परामर्श देने का प्रश्न ही नहीं। ऐसे लोगों से भी अपनी किसी बात को न बतायें, जो आपकी बात सुनते तो हैं, परन्तु उसे दूसरों के सामने बता देते हैं। ऐसे लोगों से कोई भी महत्वपूर्ण बात साझा करना खतरे से खाली नहीं। निश्चय ही वे आपकी योजना को किसी भी दशा में सफलता की मंजिल तक पहुंचने में अवरोधक का काम करेंगे। उसे सुनने वालों में आपके शुभचिंतक और हितैषी कम और हानि पहुंचाने वाले अधिक होंगे। एक से दूसरे में बात फैलती जायेगी। जो आपकी समस्या के प्रति हृदय से सहानुभूति रखते हैं, वे आपकी बात को सुनेंगे। गम्भीरता से सोचकर अपने बौद्धिक स्तर के अनुसार परामर्श भी देगा, यथा सम्भव सहायता भी करेगा, परन्तु आपकी बात को दूसरों के सामने नहीं कहेगा। ऐसे लोगों पर आप भरोसा कर सकते हैं। अपने अन्दर की बात बता सकते हैं। ऐसे ही लोग आपकी ताकत होते हैं। इन्हें कभी खोना नहीं चाहिए।

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