अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रभु का नाम जपने का अर्थ है उनका संग करना। जिस प्रकार मित्रों का संग करने पर वे अपनी सारी बातें तुम्हारे सामने प्रकट कर देते हैं, उसी प्रकार परम मित्र परमेश्वर का संग करने पर वे अपना तत्व तुम्हारे सामने प्रकट कर देंगे, परन्तु सब जानते समझते भी हम प्रभु को भुला बैठे हैं, उसका संग नहीं करते, उसका स्मरण नहीं करते। भूलने का अर्थ यह नहीं कि हम उसका नाम नहीं लेते। नाम तो उसका हम बहुत लेते हैं, परन्तु उसकी आज्ञा नहीं मानते। उसकी अवज्ञा करना ही उसको भुलाना है। मन में कोई बुरा विचार आया, उस समय आत्मा के माध्यम से परमात्मा की जो आज्ञा मिले, उसी के अनुसार हमें अपना आचरण करना चाहिए, परन्तु हम उसकी आज्ञा की उपेक्षा कर देते हैं और बुरे विचारों को कार्यरूप दे देते हैं। यही उसका भुलाना है। उसकी सत्ता को अपने सामने समझें, मानो हम उसके संग बैठे हैं और वह हमें बुरे काम करने से रोक रहा है। भीतर से जो आदेश मिले, उसका पालन करें, यही उसका जप है, यही उसकी उपासना है और यही उसका स्मरण है।

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