अनमोल वचन

अनमोल वचन

मन भोग विलास के कार्यों में ऐसा दौडता है, जैसे मांस पर पक्षी झपटता है और सतकर्मों से ऐसे भागता है, जैसे बालक पाठशाला से। समुद्र को सुखा देना आसान है, बडे भारी पर्वतों को उखाड डालना भी कठिन नहीं, परन्तु मन को वश में कर लेना सबसे कठिन कार्य है। रोगों के समान ही यत्नपूर्वक इस मन की चिकित्सा करनी चाहिए। मन की चिकित्सा करने के लिये आसक्ति को विचारपूर्वक त्यागकर निरासक्ति को अपनायें। पूर्णरूपेण अनासक्त होने पर ही मन पर नियंत्रण हो पायेगा तथा आत्म साक्षात्कार भी तभी सम्भव होगा। लोहे से लोहा कटता है, बिल्कुल उसी प्रकार मन को मन से काटो। शुभ विचारों से ही अशुभ विचारों का त्याग किया जा सकता है। आत्मचिंतन ही मन को शीघ्र वश में करने का उत्तम साधन  है। मन ही मनुष्य का मित्र और मन ही मनुष्य का शत्रु है। वैराग्य और साधना के शस्त्र द्वारा मन के असत रूप को काट डालो, क्योंकि यह मन ही है, जिसने नाना संकल्पों के द्वारा इस विशाल जगत का विस्तार किया है, जिसके कारण जीव मनो मोह के गर्त में पडा हुआ है।

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