अनमोल वचन

अनमोल वचन

जब हम किसी दुविधा में फंसे हों, दुख और रोग से पीडित हों तो गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। गायत्री का जप परम लक्ष्य तक पहुंचाने वाला है। देवी भागवत के अनुसार गायत्री की ही उपासना सनातन है, सब वेदों में गायत्री की उपासना की शिक्षा दी गई है, जिसके बिना ब्राह्मण का सर्वथा अद्य:पतन हो जाता है। गायत्री मंत्र से निष्णात द्विज मोक्ष को प्राप्त होता है। ‘गायत्री मंत्र को गुरू मंत्र कहा जाता है। चारों वेदों में इसका वर्णन है। अथर्ववेद के अनुसार यह वेदमाता, गायत्री माता, द्विजो को पवित्र करने वाली, आयु, स्वास्थ्य, सन्तान, पशु, धन, ऐश्वर्य और प्रभु दर्शन कराने वाली है। गायत्री मंत्र के जप से ब्रह्म की प्राप्ति होती है, ये चित्त को एकाग्र तथा बुद्धि को निर्मल बनाती है। महर्षि व्यास के अनुसार पुष्पों का सार मधु है, दूध का सार घृत है और चारों वेदों का सार गायत्री है। गंगा शरीर के मल धो डालती है और गायत्री गंगा आत्मा को पवित्र कर देती है, सभी को पूर्ण श्रद्धा के साथ गायत्री का जाप करना चाहिए।

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