अनमोल वचन

अनमोल वचन

ओउम् भुभुर्व: स्व: तत्सविर्तुवरेणयम् भर्गो देवस्य धिमही धियो यो न प्रचोदयात्। ‘हे प्राण रक्षक, प्राणाधार, दुख, विनाशक, सुखों के प्रदाता तू सारे जगत को उत्पन्न करने वाला है, सबको प्रकाश देने वाला है, तू ही वरण करने योग्य है। हे मेरे प्यारे प्रभु मैं तेरे दिव्य तेज को धारण करता हूं। मैं अपनी बुद्धि को तेरे अर्पण करता हूं, इसे अपनी ओर ले चल। विद्वानों ने इस गायत्री को चारों वेदों का सार कहा है, भूलोक की कामधेनु माना है। संसार इसका आश्रय लेकर सब कुछ प्राप्त कर लेता है। चरक संहिता में कहा गया है ‘जो ब्रह्मचर्य पूर्वक गायत्री की उपासना करता है और ताजे आंवले के रस का सेवन करता है, वह शतायु होता है। गायत्री एक अनुपम रत्न है, गायत्री से बुद्धि पवित्र होती है और आत्मा में ईश्वर का प्रकाश आता है। गायत्री में ईश्वर पारायणता का भाव उत्पन्न करने की शक्ति विद्यमान है। कुमार्गी से कुमार्ग छुडाकर सन्मार्ग पर चला देती है। रोगियों और आत्मिक उन्नति चाहने वालों के लिये यह अत्यंत उपयोगी मंत्र है।

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