अनमोल वचन

अनमोल वचन

समय रूकता नहीं, गतिशील है। अनंतकाल से यही क्रम चल रहा है। देखते-देखते वर्ष 2016 बीता। नववर्ष की प्रात: की शुभवेला में हम 2017 का अभिनन्दन कर रहे हैं। नया वर्ष मंगलमय हो, इस शुभकामना के साथ एक-दूसरे को संदेश प्रेषित कर रहे हैं। शुभकामनाएं प्रेषित करने वाला अन्तर्मन से शुभ की कामना कर रहा है अथवा केवल औपचारिकतावश यह तो वही जानें। शुभकामना हृदय से भी है तो भी मात्र शुभकामनाएं ही पर्याप्त नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और आचरण भी वैसे ही होने चाहिए। हमें कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे किसी का किसी प्रकार का अहित अथवा अवमानना हो। आचरण ऐसा हो कि दूसरों का लाभ ही लाभ हो, हम अन्य की क्या कहें, अब तो अपने ही ऐसा आचरण तथा व्यवहार कर रहे हैं कि बेगाने भी ऐसा करते शरमा जायें। हमारे दर्शन में प्रभु से अंधेरे से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर जाने की कामना की गई है। अंधकार और असत्य क्या हैं, अज्ञान, पर हानि, पर निंदा, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, लोभ, आवश्यकता से अधिक संग्रह, चोर बाजारी, काला धन, पर शोषण ही असत्य हैं, अंधकार हैं। वर्तमान शासन ने तो प्रजा हित में कुछ साहसिक कदम उठाये हैं, अंधकार को हटाने के प्रयास किये हैं, किन्तु हमारे भी कुछ कत्र्तव्य हैं, इन्हें समझा जाये, उनका पालन किया जाये, ताकि नया वर्ष अंधकार को मिटाकर राष्ट्र को नव प्रकाश देने वाला सिद्ध हो।

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