अनमोल वचन

अनमोल वचन

चलते-चलते पैरों में कांटा घुस गया, पीडा दे रहा है, पीडा दूर होगी कांटा निकालने से, उसे और अधिक चुभायेंगे तो पीडा अधिक होगी। इसी प्रकार किसी से विवाद हो गया तो उससे द्वेष हो गया। उसे नष्ट करने की, उसकी हानि करने की सोच रहे हैं, तो लगा हुआ कांटा और भीतर चुभा रहे हो। वह भी आपका बुरा सोच रहा होगा। बुरा हो पायेगा या नहीं, यह तो बाद की बात है, परन्तु चित्त में अशुद्धता तो बढती जायेगी। उसे क्षमा कर कल्याण की सोचिए आपके हृदय से शूल निकल जायेगा। कांटे की पीडा कांटा निकालने से दूर होगी। अधिक भीतर घुसायेंगे तो पीडा सालती रहेगी। झगडे से पैदा हुआ द्वेष झगडा समाप्त करके दूर होगा अन्यथा एक-दूसरे को नष्ट करने के कुविचारों से दोनों पक्ष ही समाप्त हो जायेंगे। आपका हित इसी में है कि विनम्रता, सहनशीलता तथा क्षमाशीलता को अपनायें, विनम्र भाव से अपनी और विरोधी की त्रुटियों को क्षमा करने की प्रार्थना करें। यह प्रार्थना हमारे अहंकार को समाप्त कर देगी, जिससे हमें मानसिक शान्ति मिलेगी। हम दूसरों के लिये यदि अच्छा नहीं तो बुरा भी नहीं सोचेंगे। जब हम सबके शुभ की कामना करेंगे तो प्रभु हम पर कृपालु होंगे।

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