अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार के सबसे बडे लिखित संविधान को लागू हुए आज 67 वर्ष हो गये। आज हम 68वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। हमारा देश, हमारा अपना विधान, हमारे द्वारा चुने गये शासक, यह सब कुछ अच्छा लगता है, किन्तु अच्छा तब, जब हम अच्छे नागरिक बनें। ऐसे नागरिक नहीं कि अपने अधिकारों के लिये तो आवाज उठाते रहें और कर्तव्यों के प्रति उदासीन रहें। सुख-सुविधाएं सभी चाहिए, परन्तु टैक्स देना न पडे। क्या इतने विशाल देश में मात्र 24 लाख व्यक्ति ही हैं, जिनकी वार्षिक आय 10 लाख रूपये अथवा उससे अधिक है। सच्चाई यह है कि इस विशाल देश में करोडों ऐसे लोग हैं। देश को यदि विकसित राष्ट्र बनाना है तो हमें ईमानदारी से टैक्स देना होगा। नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य के लिये पर्यावरण की सुरक्षा और स्वच्छ भारत अनिवार्य शर्त है। स्वच्छ भारत ही स्वस्थ भारत की गारंटी दे सकता है। समस्या यह है कि हम हर समस्या का समाधान सरकार से चाहते हैं, जबकि जनता के सहयोग के बिना कोई भी कार्यक्रम पूर्ण सफल नहीं हो पाता। नागरिकों से अधिक उत्तरदायित्व उन माननीयों का है, जिन्हें हम चुनकर भेजते हैं। वे स्वयं को सेवक नहीं, शासक समझते हैं। हम सभी (कुछ अपवादों को छोडकर) राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा से मुंह फेरकर कितनी अहसान फरामोशी कर रहे हैं। जिस मिट्टी में पैदा हुए, जिसके अन्न, जल से पले और उसी मिट्टी में मिलना भी है, उसका हम पर ऋण है, उससे गद्दारी करना बहुत बडा पाप है। इस पाप से बचने के लिये स्वयं में भी और अपने पडौसी में भी राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य बोध जगाकर राष्ट्र ऋण से उऋण होने का प्रयास करें।

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