अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य अपने जीवन में सुख चाहता है, भौतिक सुख सुविधाएं पाने का प्रयास भी करता है। उन्हें प्राप्त करने के लिये कभी-कभी अनीति का सहारा लेने में भी संकोच नहीं करता, परन्तु सुख-सुविधाएं तथा सम्पदा जुटाने के लिये नीति का त्याग कर अनीति को अपना लेना अनर्थ है। इसके परिणाम भयंकर, अशुभ एवं अमंगलकारी हैं। नीति विरूद्ध आचरण मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है। अनीति से दुख, कष्ट तथा पाप बढते हैं। अशान्ति तथा अवसाद उत्पन्न होता है। यह मानव जीवन की असफलता है, जबकि नीति का अनुसरण गहन अन्धकार में भी प्रकाश पुंज है, मार्गदर्शक है। आज के युग में क्या हो रहा है, जिसके कारण इतनी अशान्ति है। नीति अनीति के मध्य भेद समाप्त होता जा रहा है, इसीलिये दुराचार बढता जा रहा है। जीवन में बैरभाव, घृणा, हिंसा,ईर्ष्या, तनाव तथा अशान्ति बढ रही है। कलह-क्लेश ने जीना दूभर कर दिया है। इसीलिये सच्ची प्रगति और आम कल्याण के लिये नीति का मार्ग ही अपनाना श्रेयष्कर है, अपने लिये भी और दूसरों के लिये भी।

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