अनमोल वचन

अनमोल वचन

आज मनुष्य इसलिए दुखी है, असंतुष्ट है कि वह ज्ञान होते हुए भी काम, क्रोध, लोभ के वशीभूत हो ज्ञान के विपरीत आचरण करता है। यह जानते हुए भी कि मूल्य आधारित सुख एवं शांतिपूर्ण सामाजिक जीवन के लिये संयमपूर्ण आचरण अति आवश्यक है। वह अप्राकृतिक रूप से स्वच्छंद व्यवहार करता है। देवताओं और राक्षसों में मात्र इतना ही तो अन्तर है कि देवताओं का आचरण ज्ञान, धर्म एवं संयम से पूर्ण होता है तथा राक्षसों का अज्ञान एवं अधर्मपूर्ण। हमारे विपरीत आचरण का सबसे बडा कारण हमारा दूसरों के वैभव को देखकर वैसा ही बनने या वैसा ही पाने की कमजोरी है। उसके लिये उचित-अनुचित जो भी समयानुसार आवश्यक है, वह मार्ग हम अपनाते हैं, जिसका परिणाम पतन, तनाव, पीडा एवं नाना प्रकार के कष्टों में होता है। सुख पाना है तो दूसरों के ऐश्वर्य को देखकर अपना धैर्य मत खोयें, परिश्रम और ईमानदारी की अपनी कमाई से संतुष्ट रहें।

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