अनमोल वचन

अनमोल वचन

हम अपने को सजाने का नहीं, संवारने का प्रयास करें। जीने की कला सीखें, जितनी ऊर्जा हम सजने में लगाते हैं, उससे आधी ऊर्जा भी यदि हम संवरने में लगायें तो संसार के कष्ट दूर हो जायें। सजने का अर्थ है व्यक्ति के भीतर अहंकार की जगती हुई प्यास के अतिरिक्त कुछ भी नहीं। हम सभी प्रथम आने के पागलपन से त्रस्त हैं, सभी इस रोग से पीडित हैं। हम महत्वाकांक्षाओं के द्वार पर खडे हैं। यह एक ऐसी बीमारी है, जो सभी के जीवन का सुख-चैन छीन लेती है। जीवन को ऐसे जीयो, जिससे इस जीवन के साथ-साथ अगले जीवन को संवरने, संवारने में ध्यान रहे। जीवन मिलता नहीं, निर्मित करना होता है। जन्म मिलता है, जीवन का निर्माण करना पडता है, इसलिए मनुष्य को संस्कारों की आवश्यकता है। जैसी शिक्षा मिलेगी, वैसे ही संस्कार बनते जायेंगे, इसलिए शिक्षाएं ऐसी हों, जो जीवन जीने की कलां सिखाये। ऐसे गुणों को आत्मसात करें कि दूसरों का सम्मान करना आये, अहंकार छू न जाये।

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