अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoहिंसा तीन प्रकार की बताई गई है। आध्यात्मिक, मानसिक, शारीरिक। आध्यात्मिक हिंसा वह है, जिससे अपनी आत्मा को मलिन कर लिया जाये, जब दूषित मनोवृत्ति से दूसरों को हानि पहुंचाने का यत्न होगा, तो ऐसा करने वाला आत्मघाती हो जायेगा। ईशोपनिषद के कथनानुसार ऐसा व्यक्ति घने अंधेरे में ढकी नीच योनियों में भेज दिया जायेगा। मानसिक हिंसा वह है कि मन द्वारा दूसरों के प्रति बुरा चिंतन करना। मन द्वारा यदि मैं किसी अन्य के लिये बुरा विचार करता हूं तो वे बुरे विचार मेरे मन को कलुषित कर देंगे और मैं स्वयं अपने मन की हिंसा करने वाला बन जाऊंगा। शारीरिक हिंसा वह है कि अपने शरीर द्वारा किसी को हानि पहुंचाना या किसी के प्राण हर लेना। इन सब प्रकार की हिंसा से बचने के लिये ईशोपनिषद ने जो मार्ग बतलाया है, उसी का अनुसरण हम सबको करना चाहिए। यस्तु सर्वाणि भूतान्या त्मत्रेवानु- पश्यति सर्व भूतेषु चात्मानाम् ततो न बिजुगुप्ससे।। जो सम्पूर्ण प्राणियों में परमात्मा को देखता है, वह सम्पूर्ण प्राणियों में आत्म स्वरूप को देखता है। उसके पश्चात वह कभी भी किसी से घृणा नहीं करता, घृणा रहित मन मे हिंसा का भाव उभरेगा ही नहीं।
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