अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanएक लोकोक्ति है, जिसका अर्थ है कि चिता निर्जीव को जलाती है, किन्तु चिन्ता तो जीवित व्यक्ति को ही जला देती है, भस्म कर देती है। आदमी का जीवन कांटेदार वृक्ष के समीप उगे केले के पौधे के समान है। जिस प्रकार हवा चलने पर केले के पत्ते कांटेदार वृक्ष के द्वारा छलनी हो जाते हैं और वे धीरे-धीरे सूख जाते हैं, उसी प्रकार चिन्ताओं के झोंके प्रतिदिन मनुष्य के हृदय को छलनी करते रहते हैं। हमारी चिन्ताओं का कारण हमारी अज्ञानता और परमात्मा के न्याय में हमारा आधा अधूरा विश्वास है। हम उसके न्याय में विश्वास भी करते हैं और नहीं भी करते। उसका जो निर्णय हमारे पक्ष में होता है, हम कहते हैं कि देखो परमात्मा न्यायकारी है और जब हम किसी कष्ट या विपत्ति का सामना करते हैं, तो उसके न्याय पर संदेह करने लगते हैं। सच्चाई यह है कि परमात्मा द्वारा सृजित संसार में कुछ भी अधूरा या त्रुटिपूर्ण नहीं है। जो कुछ भी हमें प्राप्त हो रहा है, हमारे किये कर्मों के अनुसार उसके कर्मफल की न्याय प्रक्रिया के अनुसार ही हो रहा है। उसकी न्याय व्यवस्था पर संदेह करना हमारी अज्ञानता है, इसलिए यदि कुछ हमारे लिये अप्रिय हो रहा है, जो हमारी चिंताओं को बढा रहा है, उसकी चिन्ता न करें, बल्कि चिन्तन करें कि जो हमने पूर्व में कर दिया, उसे तो लौटा नहीं सकते, परन्तु वर्तमान और भविष्य में हमारे द्वारा कोई ऐसा कार्य न हो, जिसका फल हमारी विपत्तियों और चिन्ताओं का कारण बने।आप ये ख़बरें और ज्यादा पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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