अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanचिंता चिता समान यह कथन अक्षरश: सत्य है। चिंता से न केवल शरीर की शक्ति का ह्रास प्रत्युत इससे मनुष्य द्वारा किया गया कार्य भी निम्न स्तर का होता है। यह मनुष्य की योग्यता को कम कर देती है। अपने कार्य को मनुष्य सुचारू रूप से नहीं कर पाता, जब उसका मन क्षुब्ध तथा चिंतित हो। मन अपनी सम्पूर्ण शक्ति और योग्यता से काम करे, उसके लिये आवश्यक है कि वह दुखों, चिंताओं, विकारों तथा क्षोभों से मुक्त रहे। चिंतित मस्तिष्क कभी ठीक प्रकार से नहीं सोचता, पूर्ण क्षमता से नहीं सोचता, न्याययुक्त नहीं सोच पाता। पाचन तंत्र पर तो चिंता तथा क्षोभ का इतना प्रभाव पडता है कि देखकर आश्चर्य होता है। जब पाचन तंत्र गडबडा जाता है, तब सारे शरीर का प्रबन्ध तंत्र ही अस्त व्यस्त होने लगता है। चिंता से न केवल स्त्रियां तथा पुरूष बूढे से दिखाई देने लगते हैं, प्रत्युत सचमुच ही बुढे हो जाते हैं। यदि कोई वैज्ञानिक संसार में चिंता को नष्ट करने का मार्ग ढूंढ ले तो वह संसार का इतना कल्याण करेगा, जितना आज तक कोई भी अन्वेषक तथा आविष्कारक नहीं कर सका।
add-royal-copy

Share it
Top