अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanमनुष्य में बहुत सी प्रतिभाएं हैं। प्रतिभा सभी में होती है। प्रतिभा कोई पैतृक देन नहीं है, परमात्मा की विशेष कृपा नहीं। मनोविज्ञान कहता है कि मस्तिष्क में लगभग तीन सौ प्रकार की कला या प्रतिभा होती है, फिर कितने शर्म, आश्चर्य और दुख की बात है कि इतिहास में थोडे लोगों के विचित्र और विशेष कार्य करके लोकप्रिय और प्रसिद्ध होते देखकर हममें उनके समान कुछ करने के लिये प्रेरणा भी नहीं जागती। मन में एक साधारण सी लहर उठती है कि हम भी ऐसे विख्यात हों, परन्तु कुछ करने को हाथ-पैर नहीं उठते, बोलने को मुंह नहीं खुलता कि हमारे मन में कौन सी कल्पना अथवा योजना भरी हुई है, जिसके क्रियान्वित होने से देश का, समाज का कल्याण होगा। राष्ट्र की समस्याएं सुलझेंगी, जो कारण हमें उन योजनाओं को उद्घाटित करने से रोकते हैं, वे शर्म, संकोच और संकीर्णता के संस्कार हमारे जीवन, समाज, देश और मानवता के लिये घातक हैं, उन संस्कारों और हीन भावनाओं को देशहित में त्यागना ही होगा, पता नहीं क्षुद्र सी लगने वाली योजना देश के लिये कितनी उपयोगी सिद्ध हो जाये।
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