अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanमां कितनी भी दयालु क्यों न हो, यदि बच्चे को भूख नहीं, वह भूख में रोता नहीं, तो वह उसे भोजन कैसे करायेगी। इसी प्रकार आप में कल्याण की उत्कंठा नहीं, आप प्रभु प्राप्ति के लिये तडफते नहीं, उसके लिये आंसू नहीं बहाते तो परम दयालु परमात्मा भी क्या करेंगे। युधिष्ठिर जुएं में हारते रहे, क्योंकि भगवान को याद नहीं किया, परन्तु द्रोपदी ने उन्हें मन से पुकारा, उन्हें याद कर आंसू बाये तो दुशासन जडवत हो गये और द्रोपदी की लाज बच गई। हृदय में भगवान के दर्शन की उसकी कृपा की प्राप्ति की लगन पैदा करोगे तो सफलता अवश्य मिलेगी, परन्तु हम करते क्या हैं? हमारे पास धन है, हम काम करने के लिये नौकर रख लेते हैं। हमें कोई अनुष्ठान करना है तो हम स्वयं न करके उसके लिये पंडित रख लेते हैं। हम उसका नाम स्वयं नहीं ले रहे हैं, पंडित से उसका स्मरण करा रहे हैं, उसके नाम की माला जपवा रहे हैं। मान लिया आप बीमार हैं तो ठीक होने के लिये दवाई स्वयं खानी पडेगी। यदि स्वयं न खाकर दूसरे से कहोगे कि मेरा रोग दूर करने के लिये वह दवाई खा ले तो रोग आपका दूर नहीं होगा, आपको भूख लगी है, आपके बदले दूसरा भोजन करेगा तो भूख उसकी मिटेगी, आप भूखे ही रह जायेंगे। इसी प्रकार कल्याण के लिये जप जाप और प्रभु भक्ति स्वयं करनी होगी, हृदय और निष्ठा से करनी होगी। कोई पंडित अथवा कर्मकांडी कहे कि, तुम्हारे नाम के जाप करके तुम्हारा कल्याण कर देगा तो यह सरासर ठगाई है।
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