अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanसंसार में टिकने वाली वस्तु कोई नहीं। शरीर में से जब प्राण निकलने लगता है, तब आंख, नाक, कान सब इन्द्रियां भी भागने लगती हैं, फिर हम इसमें क्यों उलझे रहें, उस परमात्म तत्व को पाने का प्रयत्न क्यों न करें, जिसके बिना यह सब रहते हुए भी नहीं रहता, होते हुए भी नहीं होता। फिर इन सबको अपनी मानने की भूल क्यों करें। संसार की सब वस्तुएं परम पिता परमात्मा की ही तो हैं, उसकी वस्तुओं को अपनी समझना चोरी के समान है और जो अपने पास नहीं है, दूसरों के पास है, उसे हथियाने अथवा उन्हें अपनाने का प्रयत्न करना दोहरी चोरी है। जो यह जानता है कि उसके सामने संसार के सकल पदार्थों को त्यागपूर्वक भोग करने के अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इस तथ्य को समझाने को ईशोपनिषद में शिक्षा दी गई है ईशस्या वास्यम् ईदम् सर्व यतकिंच जगत्याम् जगत, तेन व्यक्तेन मुंजीथा मागृघ कस्यं वितधनम्। संसार में जो कुछ भी पदार्थ हैं, सब ईश्वर के हैं, यहां मिले पदार्थों को त्यागपूर्वक भोग करें और किसी भी दूसरे के धन पदार्थ को मत छुओ अर्थात दूसरे की वस्तुओं पर ललचाई दृष्टि न रखें। इस मंत्र का यह भी भाव है कि संसार को भोगो तो, परन्तु उनमें आसक्ति का भाव न रखें।आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयलunnamed
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