अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanपरमात्मा की बनाई पृथ्वी पर दुष्ट-सज्जन, आस्तिक-नास्तिक, पापी-पुण्यात्मा सबको स्थान मिलता है। उसका बनाया जल सबकी प्यास बुझाता है। उसका बनाया पवन (वायु) सबको प्राण शक्ति देता है। क्या इन सबके बदले उसने कभी कोई शुल्क मांगा है, उनका मूल्य वसूला है, यदि मांगे भी तो क्या हममें उसे देने की ताकत है। जिसकी बनाई यह सृष्टि इतनी उदार है, तो वह कितना उदार होगा। इसी प्रकार गंगा गाय और शेर दोनों को मधुर जल देती है, दुष्ट-सज्जन सभी के खेतों की सिंचाई अपने जल से कराती है। उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करती। उसी प्रकार भगवान की दया सब पर समान रूप से होती है, परन्तु उसकी कुछ अपेक्षाएं भी हमसे हैं कि हम भी उसी भाव से सबके साथ समान रूप से व्यवहार करें। हम उसकी विशेष कृपाओं का अनुभव भी कर सकते हैं, उपासना और सबके साथ प्रीति करके उसकी अनुभूति की जा सकती है। हमें प्रभु की उदारता का धन्यवाद करना चाहिए। वह इस प्रकार कि हम भी प्राणीमात्र के प्रति उदारता का भाव रखें। स्वयं को भी प्रभु की ही भांति उदार बनायें, दूसरों के कुछ काम आवें, उदारता के साथ उनकी सहायता सेवा करें, तभी हम सच्चे अर्थों में उसकी उदारता और विशेष कृपाओं के विशेष अधिकारी बन सकते हैं, बने रह सकते हैं। 

Share it
Top