अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoपरम पिता परमेश्वर मनुष्य की अन्तगुहा में स्थित होकर हर क्षण आत्मोत्कर्ष की प्रेरणा देता है, किन्तु मनुष्य अपनी स्वेच्छा चारिता के कारण अन्तर की पुकार सुनकर भी अनसुनी कर देता है, जिसका दंड रोग, शोक, क्लेश, कलह, सन्ताप आदि के रूप में भुगतना ही पडता है। जन्म के पूर्व से लेकर जीवन सत्ता के अस्तित्व में आने, परिपक्व होने, क्रियाशील और समर्थ बनने तक परमात्मा जीव को मां की तरह गोदी में खिलाता, आपदाओं से बचाता, बुद्धि में परिपक्वता आने पर पाप न करने के लिये समझाता तथा डराता है। इतनी करूणावान सत्ता का संरक्षण होने के बावजूद हम कितने अभागे हैं कि उस परम सत्ता की ध्वनि को अनसुना कर दुख के भागी बनते हैं। परमेश्वर ने हमें संसार में इसलिए भेजा कि हम अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए उनसे सच्चा नाता जोडकर अपना जीवन सफल बना लें। हमारा कर्तव्य बनता है कि प्रभु की उदारता, दया और कृपा का अनुचित लाभ न उठा हम सन्मार्ग के पथिक बने रहें, भूले से भी भटकन के मार्ग पर न जायें।आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयलunnamed
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