अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoपूर्व जन्मों के पुरूषार्थ अर्थात पूर्व जन्मों के कर्मों के फल के अतिरिक्त भाग्य कोई चीज नहीं। अत: भाग्य की अवधारणा का त्याग करके सत्पुरूषार्थ द्वारा कत्र्तव्य पालन, सत्संग तथा सतशास्त्रों की शिक्षाओं का पालन करते हुए जीव को अपना उद्धार करना चाहिए। जैसे बलवान व्यक्ति बालक को आसानी से जीत लेता है, वैसे ही इस जन्म के शुभ कर्मों द्वारा भाग्य को जीता जा सकता है। इस जन्म के किये गये शुभ कर्म विफल हो जायें तो पूर्व जन्म के कुकर्म बलवान हैं, ऐसा जानकर खूब सत्पुरूषार्थ करें, ताकि पूर्व जन्मों के कुकर्मों को पराजित किया जा सके। विष में से भी अमृत का वरण कर लेना चाहिए। सद्गुण शत्रु से भी ग्रहण कर लेने चाहिए। कभी-कभी विष भी औषधि का काम करता है, यदि उसके प्रयोग कर लेने से किसी के प्राण बचते हों तो उसके प्रयोग करने में कोई बुराई नहीं। शत्रु भी विष के समान है, किन्तु शत्रु के गुण अमृत के समान हैं, इसलिए शत्रु रूपी विष से भी अमृृत को अपना लेना चाहिए, किन्तु परम मित्रों के अवगुणों को विष के समान मान उन्हें किसी भी दशा में न अपनायें, अन्यथा खोटे कर्मों में लिप्त होकर वर्तमान जीवन तथा आगामी जीवन के अपने तथा कथित भाग्य को दुर्भाग्य में बदल लेंगे।आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयलunnamed
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