अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanहम परमेश्वर से जब प्रार्थना करते हैं तो अपने लिये, अपने परिवार के लिये सुख की याचना करते हैं। प्रभु से अच्छी सन्तान मांगते हैं, अच्छा कारोबार मांगते हें, धन सम्पदा तथा मान-सम्मान मांगते हैं, किन्तु इन सबके सापेक्ष हमें प्रभु से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें काम, क्रोध, मोह, ईष्र्या, द्वेष आदि कुटिल भावनाओं से दूर रखें तथा क्षमा, सरलता, स्थिरता, निर्भयता तथा अहंकार शून्यता हमारी स्थायी सम्पत्ति बने। यदि मनुष्य को सुख, शान्ति और आनन्द की कामना है तो उसके लिये श्रेयष्कर यही है कि क्रोध, घृणा और ईष्र्या की भावना को मन से निकाल दे। हमारे द्वारा कोई भी प्राणी बदले की भावना का शिकार न हो। हमें अहंकार छू तक न जाये, क्योंकि इन सब दुर्गुणों के मूल में अहंकार ही तो है। जब हम अहंकारी हो जाते हैं, तो दूसरों को हेय समझने लगते हैं और यही चिंतन हमारे लिये दुख का द्वार खोल देता है।आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयलunnamed
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