अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoअमुक धर्म अच्छा है, श्रेष्ठ है और अमुक बुरा है, इस विवाद में धर्म हितैषी नहीं पडते। अपने काम की योग्य वस्तु वे हर धर्म से ग्रहण कर लेते हैं तथा अनुपयोगी की उपेक्षा कर देते हैं। अच्छा देखने का स्वाभाव बनाओ, त्रुटियों की अथवा जिन्हें आपकी आत्मा स्वीकार न करे, उसकी उपेक्षा कर दो। कुछ न कुछ अच्छा हर धर्म, हर वस्तु और हर स्थान पर मिलेगा। उसे पाने के लिये नीर-क्षीर विवेक का प्रयोग करें, किन्तु उसकी आलोचना समालोचना के चक्र में न पडकर लोकहितकारी विषयों को ग्रहण कर लें। सभी धर्म हमें सत्य पर चलने की शिक्षा देते हैं। धर्म का मूल भी यही है। चोरी, बेईमानी, विश्वासघात, दूसरों की हकतल्फी की शिक्षा किसी धर्म में नहीं मिलेगी। जैसे सत्य को ही लें, उस पर सभी एकमत हैं, उसी को सभी ग्रहण कर लें तो कल्याण हो जायेगा, इसलिए हठधर्मिता को छोडकर किसी विवाद में न पडकर जो जीवन पद्धति अनुपयुक्त लगती हो, उसे त्यागकर जो आत्मोन्नति के लिये उपयुक्त लगे, उसे अपना लेना ही बुद्धिमानी है। 

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