अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoमहाभारत के समय महात्मा विदुर ने धृतराष्ट्र को पाप-पुण्य के बारे में समझाते हुए कहा पुण्यस्य फलनिच्छन्ति पुण्य नेछन्ति मानवा: फल पापस्य नेछन्ति यत्नात कुव्र्वन्ति मानवा: पुण्य का फल कौन नहीं चाहता, सब कोई चाहता है, परन्तु सच्चे हृदय से पुण्य के कार्य कितने मनुष्य करते हैं, निश्चय ही बहुत कम और पाप का फल कौन चाहता है, निश्चय ही कोई नहीं। आश्चर्य कि लोग डरकर भी पाप करते हैं, प्रयत्नपूर्वक करते हैं, जान बूझकर करते हैं। ऐसे व्यक्तियों को क्या कहा जाये। पाप हंसते-हंसते करते हैं, परन्तु जब फल भुगतने की बारी आती है, तो चीख मार-मारकर रोते हैं। सभी को यह याद रखना चाहिए कि मनुष्य पुण्य का फल पुण्य में ही पाता है। पुण्य करने वाला नाम कमाता है, सम्मान पाता है, जबकि पाप कर्म करता हुआ पापी अपने पाप के कारण लोक में निंदित होता है और पाप का फल दुख के रूप में पाता है। जिन कर्मों से आत्मा को सन्तोष प्राप्त हो, मनुष्य की सर्वत्र प्रशंसा हो, कीर्ति बढे, सम्मान मिले, वही पुण्य कर्म और जिन कर्मों से मनुष्य पतित हो, वह पाप कर्म समझना चाहिए।आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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