अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanपाप से बचने के लिये पूर्व में किये गये पाप कर्मों के लिये प्रायश्चित किया जाता है। प्रायश्चित अर्थात पूर्व में किये गये पाप कर्मों के लिये पश्चाताप करना तथा ऐसे कर्म भविष्य में न करने का संकल्प। जब हम प्रायश्चित करते हैं तो पाप बुद्धि पर विराम लग जाता है और हम धर्म और सत्कर्म की ओर उन्मुख हो जाते हैं। हममें सुधार होना प्रारम्भ हो जाता है, अनुकूल चारित्रिक परिवर्तन होने लगता है, क्योंकि परिवर्तन के बिना प्रायश्चित ऐसा है, जैसे छिद्र बंद किये बिना नाव से पानी निकालना। पुन: उस पाप कर्म को न करने का संकल्प ही प्रायश्चित है, किन्तु पहले जमे पाप के प्रभाव को, उस प्रवृत्ति से तो स्वयं को मुक्त करना ही होगा। प्रायश्चित से वास्तव में कोई पाप क्षीण नहीं होता, अपितु पाप भावना निर्बल होती है, पाप के प्रति खिन्नता पैदा हो जाती है, आत्मा पवित्र होती है, भविष्य में व्यक्ति सावधान रहता है।आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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