अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanपारस लोहे को सोना बना देता है, परन्तु उसका स्वभाव रूप और उपयोगी बना देने की क्षमता स्वर्णकार के पास है। इन्सान के भीतर इन्सानियत जगा दे, माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का भाव जगा दे और व्यक्ति के व्यक्तित्व को बल दे, उसमें निखार ला दे, उस शक्ति का नाम है सद्गुरू। गोस्वामी तुलसीदास के शब्दों में ज्ञान हथौडा हाथ लिये, सद्गुरू मिले सुनार, तुलसी तीनो मिट गये, मार, धार, आकार। जीवन में गुरू का सानिध्य प्राप्त होने का तात्पर्य है, जब आतुर जिज्ञासु शिष्य को विराटता की थोडी सी झलक मिल जाये। वर्षा की बूंद में संसार का थोडा सा स्वाद मिल जाये तथा अंकुरित बीज से सम्भावनाओं के अनगिनत फूल पुष्पित होते दिखाई दें, किन्तु ऐसा तभी सम्भव है, जब जिज्ञासु शिष्य को सच्चा गुरू प्राप्त हो, जो आज के युग में बहुत परिश्रम से प्राप्त होता है। पहले देखें, जानें, परखें और जिन्हें आप गुरू बनाना चाह रहे हैं, उनके सम्बन्ध में पूर्ण जानकारी प्राप्त करें, अन्यथा किसी कपटी, पाखंडी को भी आप गुरू बना सकते हैं, फिर सच्चाई जानने पर आपकी भावनाएं ही आहत होंगी।

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