अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanध्यान- जब अन्त:करण की वृत्ति संसार की ओर से विमुख होकर आत्मा की ओर मुडती है, आत्मा के सम्मुख होती है, उस समय की वृत्ति का नाम ध्यान है। ध्यान चित्त की एक विशेष स्थिति है। ध्यानावस्था में आत्मा परमात्मा के सम्मुख होती है। ध्यानावस्थित होने का अर्थ है क्रियारहित होना और सन्यास- कहा जाता है कि अमुक व्यक्ति ने सन्यास ले लिया है अथवा अमुक व्यक्ति सन्यासी हो गया है, किन्तु सन्यास का साधन तो किया जाता है, परन्तु लिया नहीं जाता, किया नहीं जाता, दिया नहीं जाता, अपितु सन्यास तो एक स्वाभाविक स्थिति है। सन्यास तो यथार्थ बोध का फल है। जहां कुछ होने, बनने, पाने (प्रसिद्धि और कीर्ति की चाह) की इच्छा है, वहां यथार्थ बोध हो ही नहीं सकता। सन्यास चित्त की एक विशेष स्थिति है, केवल नाम परिवर्तन, वस्त्र परिवर्तन तथा गृह परिवर्तन मात्र ही सन्यास नहीं, अपितु भावना परिवर्तन तथा चित्त की निर्वासनिक दशा ही तो वास्तविक सन्यास है।आप ये ख़बरें और ज्यादा पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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