अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanस्वयं को पहचानो, तुम निरे माटी के पुतले नहीं हो, हाड-मांस के थैले नहीं हो, निर्जीव मुर्दे के समान नहीं हो, किन्तु तुम एक सजीव शक्ति सम्पन्न पुरूष हो। तुम्हारे जीवन का अस्तित्व खाने-पीने व सोने मात्र के लिये नहीं है, किसी विशेष उद्देश्य को पूर्ण करने के लिये ही यह मानव जीवन प्राप्त हुआ है। हरेक मनुष्य में दैवी शक्ति छिपी हुई है और वह सब कुछ कर सकता है। संशय और संदेह को अपने हृदय मन्दिर से बाहर निकाल दो, निर्बलता, निराशा, भय और चिंता से मुक्त हो जाओ। भय कमजोरी है, भय निर्बलता है, भय पाप है, भय मृत्यु है और भय तुम्हारा व सम्पूर्ण मानव जाति का प्रबल शत्रु है। सदा निर्भय रहो, चेतन रहो, जागृत रहो और भूलकर भी चिंता, भय, शंका को मन मन्दिर में प्रवेश न होने दें। कभी निराश न हों। चट्टान के सदृश दृढ रहो, अपने मार्ग पर दृढतापूर्वक डटे रहो, समस्त मानसिक और शारीरिक निर्बलताओं पर विजय प्राप्त करो। याद रखो निर्बल का कोई सम्मान नहीं करता। सभी उसकी उपेक्षा करते हैं। बलवान का सभी अभिवादन करते हैं। 

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