अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoसरकारी सेवाओं में कार्यरत व्यक्ति अधिवर्षता आयु पूरी करने के पश्चात सेवानिवृत्त होकर यदि वें यह मानकर खाली बैठ जायें कि बहुत काम कर लिया, अब तो सरकार भी आराम करने के लिये कह रही है, अब हम पेन्शन के रूप में मिलने वाले धन से शेष जीवन आराम से व्यतीत करेंगे। कृषक भी प्रौढावस्था को पार करके वृद्धावस्था की ओर चल देता है, वह सोचने लगे कि अब तो खेतीबाडी सन्तान सम्भालेगी, मैंने तो बहुत काम कर लिया, अब मेरे आराम करने का समय आ गया है। व्यापारी भी अपनी उस आयु में आकर इसी प्रकार की धारणा बना ले तो इन सबके सामने विकट समस्याएं निश्चित रूप से आयेंगी। यदि आप भी अपने विचार ऐसे ही बना बैठे हैं तो इन विचारों को आज ही तिलांजलि दे दो अन्यथा असम्मान की स्थिति का सामना करना पडेगा। यदि सम्मान की कामना है तो मृत्युपर्यन्त सक्रिय रहो, उपयोगी बने रहो। उपयोगी नहीं रहोगे तो न घर के सदस्य आदर करेंगे और न बाहर सम्मान प्राप्त होगा। सदा से ही अनुपयोगी वस्तुओं का निरादर होता आया है, चाहे वे जड वस्तुएं हो अथवा चेतन मनुष्य। निष्क्रिय हो जाओगे तो किसी काम के किसी उपयोग के नहीं रहोगे तो फेंक दिये जाओगे और तो और आपकी सन्तान भी आपकी उपेक्षा कर देगी, इसलिए सक्रिय रहो और कुछ विशेषताओं के साथ सक्रिय रहो। महत्वहीन, निरूद्देश्य, अनुत्पादक सक्रियता को कौन महत्व देता है। इस युग में तो उपयोगी और सक्रिय रहने के बावजूद सम्मान पाना कठिन हो गया है।[आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल बुलेटिन की मोबाइलएप को डाउनलोड कीजिये….गूगल के प्लेस्टोर में जाकर
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