अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoशारीरिक और चारित्रिक स्वास्थ्य हमारा मूलभूत धर्म है, परन्तु विडम्बना यह है कि हम स्वस्थ तो रहना चाहते हैं, परन्तु आचरण उसके अनुरूप नहीं कर पाते, बल्कि प्रतिकूल आचरण करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विचार से आचरण बनता है और मनुष्य उसी आचरण के अनुरूप कर्म करने लगता है। चरण (कदम) जिस मार्ग पर पडे उसी को आचरण कहते हैं। प्रत्येक मनुष्य का अपने दैनिक जीवन का प्रात: का समय आत्मिक चिंतन और मनन के लिए होता है। प्रात:काल का चिंतन ही दिनभर मनुष्य को अपने कर्म की प्रेरणा देता है, जिस व्यक्ति का प्रात:काल सुखद बन जाता है, उसका पूरा दिन सुखद बन जाता है, इसलिए विवेकशील लोग प्रात:काल के समय को आत्मचिंतन प्रभु स्मरण, हंसने- मुस्कराने और आनन्दित होने में लगाते हैं।
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  प्रात: उठने के पश्चात प्रभु स्मरण सबसे प्रथम कर्तव्य है, उसका हृदय से किया गया स्मरण आपको उसके आशीर्वाद और कृपाओं का अधिकारी बनायेगा। प्रभु स्मरण के पश्चात बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करना भी पूजा का एक भाग है। उनके प्रति सेवा भाव रखोगे तो उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होगा। उनकी कृपा दृष्टि और उनके आशीष वचन पूरे दिन के लिए शुभ फलों के देने वाले होंगे। प्रात:काल अच्छा तो सारा दिन अच्छा।

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