अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanइन्सान का शारीरिक अस्तित्व एक बुलबुले के समान है जो आंखे झपकते ही समाप्त हो जाता है। ‘है’ से ‘था’ हो जाता है। जो अहंकारवश किसी को कुछ नहीं समझता वह एक दिन खाक बनकर जमीन पर बिखरा होता है। यह संसार इंसान का स्थायी डेरा नहीं है और अस्थायी भी ऐसा कि कल का पता नहीं। कल का तो छोडिये पल का पता नहीं। यह संसार ऐसी सराय है, जहां यात्री आते हैं, एक दो दिन ठहरते हैं फिर आगे चले जाते हैं। आत्माएं शरीर बदलती रहती है, प्रकृत्ति में परिवर्तन होता रहता है केवल परमात्मा ही ऐसा है जो एक सा रहता है, क्योंकि वह अजन्मा है। सारे ब्रह्मांड का रचनहार और आधार परमात्मा ही है, उसमें कोई परिवर्तन होता ही नहीं, जबकि दुनिया की सच्चाईयां मौसम की भांति बदलती रहती है वह एक रस नहीं रहती। शिशु के रूप में आरम्भ हुई इंसान की जीवन यात्रा धीरे-धीरे किशोर अवस्था फिर जवानी और फिर जवानी भी बुढापे में। अन्त में वह समय भी आता है, जब वह वर्तमान से ‘भूत’ बन जाता है। इस सच्चाई को सृष्टि के आरम्भ से ही सब देखते आ रहे हैं, किन्तु जानते समझते भी इसे भूले रखना चाहते हैं। यदि याद रखी जाये तो शायद दुनिया की सारी समस्याएं ही समाप्त हो जाये।

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