अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanआमदनी यदि प्रात:काल का एक घंटा आनन्दित होने में व्यय करें तो उसके आनन्द की ऊर्जा उसे दिन भर प्रसन्न बनाये रखती है। प्रात:काल कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे मनुष्य को क्रोध आ जाये, चिंता और तनाव बने, मन अशांत हो जाये। आजकल प्रात: के समय बहुत से परिवारों में प्रात:काल से ही तनाव की स्थिति और छोटी-छोटी बातों पर मतभेद उभर आते हैं। मनोवैज्ञानिक इसका कारण यह मानते हैं कि दिन भर व्यवसायिक क्षेत्र की समस्याएं बनी रहती है तो घर आने पर छोटी-छोटी बातों पर ही मतभेद उभर आते हैं। प्रात:काल आदमी बाहर की चिंताओं से मुक्त रहता है और वह उस समय घर की छोटी सी भी चिंता से टकराने पर उसी पर केन्द्रित हो वह क्रोध में आ जाता है। क्रोध के कारण जो अशान्ति उत्पन्न होती है उससे वह दिन भर परेशान रहता है। प्रात:काल के अप्रिय प्रसंगों के कारण उसका सारा दिन खराब हो जाता है। घर की समस्याएं तो रहती ही हैं उनका निदान आपस में मिल बैठकर किया जा सकता है, किन्तु तनावग्रस्त किसी भी समस्या का निदान नहीं कर पाता। संतों का मत है कि प्रात:काल कम से कम एक घंटा शांत बैठने का प्रयास करें। दिन भर तो आदमी व्यवसायिक कार्यों में व्यस्त रहता है, तनाव भी रहते हैं, किन्तु यदि घर पर आकर भी आदमी को शान्ति न मिली तो मन मस्तिष्क विद्रोह कर देते हैं। आदमी मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से टूट जाता है।

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