अनमोल वचन

अनमोल वचन

हम लोग दूसरों की सुविधाएं देखकर वैसा ही पाने का प्रयास करते हैं। इस प्रयास से कभी-कभी बडी हानि भी उठानी पड जाती है। यह ठीक है कि हमें अच्छे के लिए प्रयास करने चाहिए, परन्तु उतावली में ऐसे काम नहीं करने चाहिए, जो नैतिक और विधिक दोनों दृष्टियों से गलत हो। हम कभी यह समझने का प्रयास नहीं करते कि परमात्मा की बनाई व्यवस्था कोई बदल नहीं सकता। समाज में अच्छे-बुरे दोनों प्रकार के लोग रहते हैं। कुछ दुश्चरित्र है तो चरित्रवान भी इसी समाज में है, निठल्ले काम चोर है तो मेहनतकश भी इसी समाज में है। उनका दृष्टिकोण भी देखिए। दोनों प्रकार के लोगों के दृष्टिकोण का अंतर भी देखिए, समाज के व्यभिचारी दुश्चरित्र लोग चरित्रवान लोगों से घृणा करते हैं, जबकि चरित्रवान चाहते हैं कि सारे समाज का चरित्र ऊंचा हो। कामचोर निठल्ला मेहनतकश से घृणा करता है। मजदूर मालिक से घृणा करता है, जबकि पुरूषार्थी चाहता है सभी पुरूषार्थ करे, मेहनत से रोजी-रोटी कमाये। मालिक भी प्रतिष्ठान खडा करके सैंकडों लोगों को रोजगार दे रहा है। इस घृणा का कोई आधार तो है नहीं पर की जाती है, जबकि अच्छे लोगों से घृणा के बजाय उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। यह भी समझना चाहिए कि हम सभी को जो मिल रहा है वह पूर्व कर्मों के अनुसार मिल रहा है। इसलिए अपने कर्म सुधारे जाये ताकि आगा तो सुधारे।

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