अनमोल वचन

अनमोल वचन

पानी ऊंचाई से ढलान की ओर स्वयं आ जाता है उसके लिए कोई जोर लगाना नहीं पडता, परन्तु जब नीचे से ऊपर टंकी तक पानी ले जाना हो तो जोर लगाना पडता है। इसी प्रकार इंसान के मन की दशा है, उसे गिरावट की ओर ले जाने के लिए कोई यत्न नहीं करना पडता, परन्तु ऊपर उठने के लिए, ऊंचाईयां प्राप्त करने के लिए काफी परिश्रम करना पडता है, जनत करने पडते हैं। सांसारिक प्रलोभनों और लालसाओं की पूर्ति के लिए वह सहज ही यत्न कर लेता है। बुराईयों के लिए तो वह पहले से ही तैयार है, परन्तु वह मानवता के गुणों से युक्त हो ऐसी प्रेरणा ऋषि-मुनि और मनीषी युगों-युगों से देते आ रहे हैं। इन्सान सारा जीवन विचारों में लिप्त होकर लालसाओं का पीछा करते-करते ही बिता देता है। मनीषी और सच्चे संत अहसास कराते रहते हैं कि हे इंसान जिस डगर पर तू चल रहा है वह विनाश का मार्ग है क्यों इस मार्ग पर चलकर अपना लोक-परलोक दोनों बिगाड रहा है। तू सूझ-बूझ का प्रयोग कर उस रास्ते पर चल जिसे महापुरूषों ने अपनाया, संतों और मनीषियों ने जिस मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

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