अनमोल वचन

अनमोल वचन

जन्म निश्चित नहीं है, क्योंकि मोक्ष प्राप्त होने के बाद जन्म नहीं होता, किन्तु जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है। मृत्यु तो जीवन के कालीन पर पैर रखकर आती है। नवजात शिशु की पहली किलकारी में मृत्यु की अंतिम घोषणा छिपी होती है। जन्म मंगल है तो मृत्यु अमंगल कैसे हो सकती है। हमारी सोच ने उसे अमंगल माना है, परन्तु ऐसा है नहीं। विकारों से पूर्ण मनुष्य ही मृत्यु से भय खाता है। उसे अमंगल मानते हैं। जीवन का गणित कुछ उल्टा है उसमें वर्तमान को सुधारों तो भविष्य सुधरता है, जीवन को सुधारों तो मृत्यु सुधरती है, मृत्यु रिटर्न टिकट है। तुम्हें कल वापिस भी तो जाना ही है। नाव की लकडी यदि खण्ड-खण्ड हो जाये तो वह पानी में तैर तो सकती है, परन्तु किसी को नदी पार करवाने में सक्षम नहीं हो सकती। इसी प्रकार मनुष्य के कर्म बिखर गये तो उसे जीवित मनुष्य तो कहा जायेगा, किन्तु ऐसा जीवन और ऐसे कर्म अगले जन्मों को सुधारने में सक्षम नहीं हो सकते।

Share it
Top