अनमोल वचन

अनमोल वचन

कितना अज्ञानी है इंसान कि पाप स्वयं करता है और जब उसका दुख रूप में फल मिलना आरम्भ हुआ तो दोष ईश्वर को देने लगता है। हम स्वयं सुधरने का प्रयास नहीं करते। लोक व्यवहार में तो हम अपनी असफलता का दोष दूसरों को देते ही हैं। परमात्मा को भी दोषी ठहराने में कोई कमी नहीं छोडते। बुद्धिमानी इस बात में है कि समय रहते सीधी राह पर आ जाओ। सही रास्ते पर तो आना ही पडेगा। भले ही आज नहीं कुछ समय के बाद अथवा कई जन्मों के पश्चात। प्रकृति की समस्त चेष्टाएं सम्भवत: आपको बुरी लग रही है, जो समय-समय पर आपको चेता रही है तथापित ये आपकी भूलों को सुधारने की उस दयालु की एक चेष्टा है। हम समझे न समझे यह हमारी मर्जी। जब दुखों की मार खाकर भी फिर नेक रास्ते पर ही आना है, नियमों का पालन करना ही है तो ऐ सुधी मानव क्यों नहीं अभी इसी समय ऐसा करने को कटिबद्ध हो जाता। जब दुख पर दुख आयेगा ठोकर पर ठोकर लगेगी जीवन असहाय सा हो जायेगा, जब भी कोई अन्य आश्रय न देख ईश्वर को ही पुकारना पडेगा। कितना अच्छा हो उसे अभी से इसी क्षण से पुकारा जाये, उसी का आश्रय लिया जाये।

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