अनमोल वचन

अनमोल वचन

कुछ लोग ही नहीं पर्याप्त लोग ऐसे मिल जायेंगे, जो अपने दुख और कष्टों के लिए परमात्मा को दोष देते हैं, कहते हैं कि इस जन्म में मैंने किसी का बुरा नहीं किया फिर भी भगवान मुझे पता नहीं क्यों दुख दे रहा है। जैसे सारी गलती भगवान की ही है अपनी गलती मानने को तैयार ही नहीं। परमात्मा हमारी दृष्टि में कठोर हो सकता है, क्योंकि वह क्षमा मांगने पर भी किये गये पाप की सजा अवश्य देता है, किन्तु बिना पाप किये वह कष्ष्ट दे ऐसा अन्यायकारी परमात्मा नहीं हो सकता। ईश्वर को दोष देकर कि उसे बिना कारण ही दुखों की आग में झोंका गया। हम एक और पाप अपनी झोली में डाल रहे हैं। निष्पक्षतापूर्वक विचार करके कि क्या कभी स्वयं को भी अपने दुखों के लिए दोषी माना है, कभी स्वयं को निष्पक्ष होकर आका है। परमात्मा नियमों को न जानकर उनके विपरीत तो स्वयं चलते रहे, उन नियमों की अवहेलना करने में ही अपनी शान समझते रहे और जब नियमों को तोडने का दण्ड मिलना आरम्भ हुआ तो दोष देना परमात्मा को ही आरम्भ कर दिया। इसलिए समय रहते सुधर जाओ, रास्ते पर आ जाओ अन्यथा दुखों की आग में तपते जन्म पर जन्म बीतते जायेंगे, तब न रोने से कुछ होगा न पछताने से कुछ होगा।

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