अनमोल वचन

अनमोल वचन

कुछ लोग टिकट लेते हैं, बिल जमा कराते किसी उत्सव आदि में सम्मिलित होने के लिये प्रवेश करते पंक्तिबद्ध होकर खडा होने में हिमाकत समझते हैं। समय की बर्बादी समझते हैं। ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि अनुशासित तरीके से उठाया गया एक-एक कदम कार्य को सुचारू और व्यवस्थित बनाता है। समय की बर्बादी नहीं, बचत होती है। विद्यालय में बच्चों को सिखाया जाता है कि एक-दूसरे का अभिवादन करो, अपने मित्रों के साथ शालीनता का व्यवहार करो, प्रार्थना सभा और छुट्टी के समय पंक्तिबद्ध होकर निकलो आदि..। देखने में ये बातें छोटी लगती हैं, परन्तु ये बच्चों में अनुशासन का बीज बोती हैं। अनुशासन अर्थात स्वशासन। जिसने स्वयं पर शासन करना सीख लिया, उसने जीने की कला सीख ली। प्रकृति के समस्त उपादानों में अनुशासन है। सूरज का समय से उगना और डूबना, ऋतुओं का परिवर्तन होना, फलों और सब्जियों का निश्चित अवधि में पैदा होना, पकना अनुशासन की महत्ता बतलाता है। मनुष्य यदि बोली और व्यवहार में संयम बरतना सीख जाये तो वह अनुशासित कहलायेगा। बच्चे अथवा बडे हो, यह गुण आजकल कम ही देखने को मिलता है। दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली और भौतिक सुखों की चाह ने उनके जीवन से इस आवश्यक तत्व को गौण कर दिया है। पूर्वी और पश्चिमी संस्कृति की घालमेल के कारण एक ऐसे समाज का निर्माण हुआ है, जो अपने आप में बुद्धिमान परन्तु अहंकारी है। बुद्धि की टकराहट व्यक्तित्व के विकास में बाधा उत्पन्न कर रही है। जिन्हें मिल जाता है, वह अहंकारी हो जाता है और जो हारता है, वह हीन भावना से ग्रसित हो जाता है। दोनों प्रकार के लोग समाज के लिये घातक हैं।

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