अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanप्रेम का अर्थ है अहंकार का विसर्जन, प्रेम का अर्थ है क्रोध का विलय, प्रेम का अर्थ है अपने होने तक के भाव का समाप्त हो जाना। प्रेम का अर्थ है अनावृत हो जाना, जिसमें व्यक्ति का कुछ भी छुपा नहीं रह जाता। व्यक्ति जब प्रेम में प्रवेश लेता है तो वह शून्य बन जाता है। उसके ऊपर कोई आवरण नहीं होता। प्रेम में प्रवेश के क्षण में व्यक्ति निरावरण बन जाता है। आवरण रहते प्रेम में प्रवेश सम्भव है ही नहीं। यदि आवरण बचे रहे, यदि अहंकार को ओढे रखा तो प्रेम के जगत का द्वार खुल न पायेगा, उसमें प्रवेश हो नहीं पायेगा। प्रेम उतर आये तो घृणा, अहंकार विदा हो जाते हैं। प्रेम की गली अति संकरी है, उसमें प्रेम के साथ घृणा, अहंकार, कृत्रिमता के आवरण नहीं समा सकते। प्रेम को हृदय में प्रवेश दो, परमात्मा बन जाओगे, क्योंकि प्रेम ही तो परमात्मा है। लोक में जिस परमात्मा की मान्यता है, जिस जगत नियंता की कल्पनाएं हैं, वह परमात्मा तो दिखे न दिखे, पर प्रेम के रूप में इसी क्षण परमात्मा को देखा जा सकता है। इसी क्षण अनुभूत किया जा सकता है।

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