अनमोल वचन

अनमोल वचन

आप किसी व्यक्ति से प्रेम करें अथवा किसी पशु से, प्रेम की घटना तभी घटती है, जब आप उस प्राणी में प्रवेश ले सकें, जिससे आप प्रेम करते हैं। प्रेम के लिये किसी के अन्तर्मन में, किसी की अन्तरात्मा में उतरना जरूरी है, क्योंकि प्रेम आत्मा का आहार है। प्रेम पाकर और प्रेम देकर आत्मा बलवान बनती है अथवा उसकी ऊर्जा को प्रवाह मिलता है। जगत में जिस क्रिया और जिस भाव को प्रेम नाम दिया जाता है, आध्यात्म के मनीषियों ने उसे वासना नाम दिया है। संसार में प्रतिदिन प्रेम को टूटते देखते हैं, प्रेम से उठे विवादों को देखते हैं, प्रेम से निष्पन्न प्रतियोगिताओं को देखते हैं, प्रेम के कारण युद्ध भी देखे जाते हैं। थोडा विचार करें, प्रेम से यदि प्रतियोगिताएं ही प्रकट होती, प्रेम से यदि टूटन, विवाद और युद्ध ही जन्म लेते हैं तो फिर प्रेम और घृणा में अन्तर ही कितना रह जाता है। प्रेम के नाम पर जगत में जो होता है, उससे प्रेम की प्रतिष्ठा खो गई है। क्या यह विडम्बना नहीं है कि प्रेम जैसे विशुद्धतम आध्यात्मामृत को इस संसार ने कजरारा बना दिया है, कलंकित कर दिया है।

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