अनमोल वचन

अनमोल वचन

जिसका जीवन भावनाओं और संवेदनाओं से शून्य है, उसके जीवन में सब कुछ हो सकता है, परन्तु अपनापन नहीं होता। सम्बन्धों में सौंदर्य एवं सरसता नदारद होती है, जबकि घोर अभावों में भी भावना एवं संवेदना हमें भीतर से तृप्त कर देती है। हम बाहृय रूप से भले ही निर्धन हो, किन्तु आंतरिक रूप से समृद्ध होते हैं। ऐसी समृद्धि कैसे मिल सकती है, तो इसका उत्तर एक ही है कि संवेदनशीलता ही आंतरिक समृद्धि का पर्याय है। सम + वेदना संवेदना का तात्पर्य है- औरों के सुख-दुख का अपने समान अनुभव होना। यदि कोई सुखी है तो उसके सुख का अनुभव कर उसके साथ आनन्द मनाना, न कि ईष्र्या करना और यदि कोई दुखी है तो उसके प्रति सहानुभूति रखना, न कि प्रसन्न होना। संवेदनशीलता के अभाव में इसके विपरीत अनुभव होता है, संवेदनहीन व्यक्ति में सुखी के प्रति ईष्र्या एवं दुखी के प्रति निष्ठुरता का भाव प्रदर्शित होता है। यहां तक देखा गया है कि आपदाग्रस्त मृतकों के हाथों से अंगूठी, उनकी जेब से पैसे और कराहते इंसान को सहारा देने के बजाय उसके मोबाइल आदि उठाने में भी संवेदनशीन को लज्जा नहीं आती। ऐसे व्यक्ति मानवता के नाम पर कलंक हैं।

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