अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanभावनाएं हमारे जीवन का अनिवार्य तथा अभिन्न अंग है, जिसके बिना जीवन अधूरा, एकांगी एवं सूना सा हो जाता है। भावना होती है तो सब कुछ हो जाता है, परन्तु भावना शून्य के जीवन में निरसता और शून्यता ही बनी रहती है। भावनाएं शुद्ध होंगी तो जीवन में गम्भीरता होगी, जिसमें सम्बन्धों की मधुर सुगन्ध फैलती है, अन्यथा जीवन में उतनी ही कृत्रिमता होती है, जितनी नाटक में नाटकीयता। दीखने दिखाने के लिये यह सब बडा अच्छा होता है, परन्तु उसमें कहीं अपनापन नहीं होता। भावना शून्य जीवन रेगिस्तान जैसा शुष्क बंजर एवं कांटों से भरा होता है। जो स्वयं को चुभता है, काटता है और दूसरों को भी इस चुभन का अहसास दिलाता है। भावना से शून्य जीवन में भले ही कितनी भी चकाचौंध क्यों न हो, परन्तु इससे स्थायित्व की कल्पना नहीं की जा सकती, क्योंकि कृत्रिमता रंग मंच के लिये होती है, यथार्थ जीवन के लिये नहीं। नाटक के पात्र स्वयं को बेहतर समझते हैं कि वे कौन हैं, उनका क्या अस्तित्व है। देखने वाले भी जानते हैं कि यह तो मात्र मनोरंजन है, जो एक दिन समाप्त हो जायेगा।

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